ज़कात एक नई सोच के साथ

ज़कात का ऐसे भी भुगतान किया जा सकता है।

मान लीजिए कि आप जिस समाज में रहते हैं इसमें सौ (100) घर गरीबों के हैं और आप हर साल एक लाख रुपये ज़कात अदा करते हैं।

आप ज़कात दो तरह से भुगतान कर सकते हैं।

एक यह कि आप सौ घरों को हजार हजार रुपये दे दें। 

अापकी ज़कात तो अदा हो जाएगी लेकिन अगले साल भी यही सौ घर अापकी ज़कात की प्रतीक्षा में रहेंगे क्योंकि आपके हजार रुपये उनकी समय पर जरूरत तो पूरी कर दी थी लेकिन साल बीतते बीतते यह जरूरत भी लौट आई। इस तरह आप दस साल क्या पचास साल भी ज़कात अदा करते रहें तो आपके समाज से गरीबी का खात्मा नहीं हो पाएगा।

दूसरा तरीका यह है कि आप एक लाख की ज़कात को दस हजार के हिसाब से केवल दस घरों को दें और वह भी इस तरह दें कि वे इन पैसों से खुद अपने पैरों पर खड़े हो जाएं। 

यानी वह उन पैसों से स्थायी आय के लिए कोई व्यवसाय कर लें। तो अगले साल आपके समाज से दस गरीब घर कम हो जाएंगे और आने वाले दस साल में पूरे समाज से गरीबी कआ खात्मा हो जाएगा।

हमारा उद्देश्य केवल ज़कात देना न हो बल्कि इस तरह देना हो कि *आज का ज़कात लेने वाला कल का ज़कात देने वाला बन जाए।*

अब फैसला आपको करना है कि आपको केवल ज़कात अदा करनी है या फिर ज़कात अदा करने के साथ गरीबी खात्मा भी करना है

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Author: Ultimate Farhan

Adviser,writer,professional gamer,Editor

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