​ज़कात किस पर फ़र्ज़ है ?

जिस के पास निसाब के ज़्यादा रक़म हो और एक साल गुज़र चुका हो ।

निसाब क्या है ?

ये रक़म कुल मिला कर 7.5 तोला सोना या 52.5 तोला चाँदी मे से जमाने के एतबार से जिस की क़ीमत कम हो ।

किस माल पर ज़कात दी जाए ? 

सोना + चाँदी (आज के भाव से ) + बिज़नेस का माल ( हर वो चीज़ जिस को नफ़ा हासिल करने की नियत से ख़रीद रखा हो )+ केश + बेंक बेलेनस + किसी से उधार के लेना बाक़ी हो 

इन मे से अगर किसी को देना बाक़ी हो वो बाद होगा।

इस रक़म का 2.5% ज़कात दी जाएगी ।

किस माल पर ज़कात नही है ?

-एक से ज़्यादा मकान जो बेच कर नफ़ा हासिल करने के लिये ना ख़रीदा हो ।

वैसे ही ज़रूरत से ज़्यादा के बरतन , कपड़े , गाड़ी ,जानवर , ज़मीन । ( जिस को रखने का इरादा नफ़े का न हो )

हॉं इन मे से जिस मे किराया वग़ैरह की आमदनी होती हो तो उस आमदनी पर भ ज़कात फ़र्ज़ है ।

ज़कात को साल मे किसी भी एक दीन तय कर के हर साल उसी दिन निकाला जाए ये अफ़ज़ल है । ( मिसाल के तौर पर १ रमज़ान या १ मुहर्रम ।)

ज़कात किसे दी जाए ?

बड़ी तहक़ीक़ के साथ , 

जिस की आमदनी बहुत कम हो , या बड़ी बीमारी मे ख़र्च ज़्यादा हो , या ग़रीब तालीब-ए-इल्म या एसा मुसाफ़िर जो चाहे मालदार हो पर अभी घर पहुँचने लायक पैसा जिसके पास ना हो ।

एसे लोगों को ढुंढ कर अपनी ज़कात पहुँचाए , वैसे ही ना अहल को ज़कात दे देने से ज़कात क़बूल नही होती ।

सिर्फ़ अल्लाह ही सब से ज़्यादा जानने वाला है ।

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Author: Ultimate Farhan

Adviser,writer,professional gamer,Editor

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