​मुसलमान #वंदे_मातरम क्यों नहीं कहते ?

मुसलमान #वंदे_मातरम क्यों नहीं कहते ?

#वंदे_मातरम कहने में मुसलमानों की मजबूरी क्या है ?

वंदना अर्थात स्तुति और वंदना या स्तुति उसीकी की जाती है जिसकी पूजा की जाती हो !

कण-कण में भगवान है जैसे शब्दों को मानने वाला हिंदू “भारत माता की जय, वंदे मातरम” जैसे शब्द बोल कर गर्वान्वित हो सकता है परंतु मुसलमान के लिए यह बोल पाना बहुत ही कठिन है, क्योंकि वह किसी एक की वंदना करता है !

मुसलमान बनने की पहली शर्त “आशहदो अन्ना लाइलाहा इल्लल्लाह व आशह दो अन्ना मोहम्मद रसूल अल्लाह”

अर्थार्थ मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई पूजनीय नहीं और मोहम्मद साहब अल्लाह के रसूल हैं !

यहां समझिए कोई भी मुसलमान अल्लाह को छोड़कर उसकी पूजा, इबादत नहीं कर सकता, हां किसी का आदर, सम्मान, प्रेम जरूर कर सकता है !

– दुनिया के मुसलमान सबसे अधिक आदर, सम्मान और प्रेम मोहम्मद साहब की करते हैं, लेकिन उनकी वंदना नहीं करते वंदना सिर्फ अल्लाह की करते हैं !

– अपने मां के चरणो में जन्नत, एसा मानने वाले मुसलमान अपने मां की आदर करते हैं, सम्मान करते हैं परंतु वंदना नहीं करते क्योंकि वंदना सिर्फ अल्लाह की करते हैं !

– इस देश के करोड़ों मुसलमान इस देश से प्यार करते हैं सम्मान करते हैं परंतु वंदना नहीं कर सकते क्योंकि वंदना सिर्फ अल्लाह की करते हैं !

– इस देश पर कोई संकट आ जाए वह हंसकर अपने प्राण निछावर कर सकते हैं परंतु बंदना नहीं कर सकते क्योंकि वह वंदना सिर्फ अल्लाह की करते हैं !

पीरियड्स क्या है 

सबसे पहले आम भाषा में ये समझें, पीरियड्स क्या है और क्यों है।

जब लड़की माँ के गर्भ में होती है, तभी अंडाणु(ovum/ova) बन जाते हैं। करीब 20 लाख अंडाणु बनते हैं पर लड़की के जन्म लेने के समय ये घटकर 5 लाख के करीब रह जाते हैं। ये ovaries में पड़े रहते हैं, जब तक कि लड़की puberty hit नहीं करती। सामान्यतः 12-14 साल की उम्र में,(9-16 कभी कभी) इनमें से एक ovum के mature होने की शुरुआत होती है। मतलब शरीर गर्भधारण के लिए खुद को तैयार करना शुरू करता है। 

Ovary में एक अंडाणु परिपक्व होता है, झिल्ली से फूटकर बाहर आता है और फेलोपियन ट्यूब के रास्ते गर्भाशय में पहुंचता है। फेलोपियन ट्यूब में 24 घण्टे रुककर स्पर्म का इंतज़ार करता है।(आपके अगले पीरियड से 14 दिन पहले, सामान्यतः 12-16 दिन के बीच)

जिस तरह हम घर में नए मेहमान की तैयारी करते हैं, हमारा गर्भाशय भी बच्चे के लिए तैयारी करता है। नर्म आरामदायक बिस्तर के रूप में खुद को परिवर्तित करता है। इसमें सॉफ्ट टिशूज़, रक्त वाहिनियां, पोषण के ज़रूरी सब साधन होते हैं। अगर अंडाणु शुक्राणु/sperm से निषेचित हो गया, तो गर्भावस्था शुरू हो जाती है, पर 24 घण्टे में नहीं हो पाया, तो ovum सिकुड़ने लगता है और नष्ट हो जाता है। इसके साथ ही बिस्तर भी टूट जाता है,कमरे के अंदर की दीवार भी उखड़ जाती है( inner lining of uterus/endometrium) और गर्भाशयमुख(cervix) से बाहर आ जाती है। हर महीने यह प्रकिया चलती है जब तक कि प्रेग्नेंसी(टेम्पररी) या मेनोपॉज़(परमानेंट) न हो जाए।

इसे ही पीरियड्स आना कहते हैं। यह पूरी प्रकिया हॉर्मोन्स से संचालित होती है। सामान्यतः 28-32 दिन के बीच होती है। पर 22 दिन से पहले या 35 दिन के बाद आ रहे हैं, तो ये समस्या के लक्षण हैं। जिनका निदान ज़रूरी है।

जारी………..

#पीरियड्सज्ञान

​किसी की ज़िंदगी लेने में यक़ीन नहीं: बिलकीस बानो

गीता पांडे
बीबीसी संवाददाता

बिलकीस बानो के साथ 2002 में गुजरात दंगों के दौरान गैंग रेप हुआ और उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने परिवार के 14 लोगों का क़त्लेआम देखा.

15 साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहीं बिलकीस को पिछले हफ़्ते गुरुवार को उस वक़्त सुकून मिला होगा जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेप और हत्या के मामले में 11 दोषियों की उम्रक़ैद की सज़ा बरकरार रखी.

कोर्ट ने इस मामले में पांच पुलिसकर्मियों और दो डॉक्टरों को भी दोषी पाया है. इन्हें पहले निचली अदालत ने सुनवाई के दौरान बेगुनाह पाया था.

इन सभी पर सबूतों को मिटाने के आरोप थे.

‘न्यायपालिका में यकीन’

बिलकीस बानो ने बीबीसी से कहा कि इस फ़ैसले के साथ इंसाफ मिला है और इसने उम्मीद जगाई है.

उन्होंने कहा, “मुझे हमेशा से न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास रहा है. मैं इस फ़ैसले के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट की आभारी हूं. यह अच्छा फ़ैसला है. मैं इस फ़ैसले से खुश हूं.”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि राज्य सरकार और पुलिस दोनों ही इस गुनाह में शरीक है. गुनाहगारों को रेप और लूट-खसोट करने की पूरी छूट मिली हुई थी. कोर्ट ने पुलिस और डॉक्टर दोनों को दोषी बताया है. अब मुझे लग रहा है कि मुझे न्याय मिल गया है. उम्मीद है अब मुझे शांति मिल सकेगी.”

बिलकीस बानो की इंसाफ की लड़ाई लंबी और भयावह थी, लेकिन उनका कहना है कि इस लड़ाई को छोड़ने के बारे में कभी भी नहीं सोचा.

सुनिए बिलकीस बानो से बातचीत

‘जान से मारने की धमकी भी मिली’

पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए सब कुछ किया. उन्हें डराया-धमकाया, सबूत मिटाए, मारे गए लोगों को बिना पोस्टमार्टम के दफ़ना दिया.

डॉक्टरों ने यहां तक कहा कि बिलकीस बानो का रेप नहीं हुआ था. उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली.

अपराध की गंभीरता और हमलावरों को पहचानने के बावजूद इस मामले में पहली गिरफ़्तारी 2004 में हुई.

यह गिरफ़्तारी तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को मामला सौंपा.

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस मांग को भी माना कि गुजरात की अदालतों में उन्हें इंसाफ नहीं मिल सकता और केस को मुंबई की अदालत में भेज दिया.

‘दस बार घर बदलना पड़ा’

इंसाफ की इस लड़ाई में उनका परिवार बर्बाद हो गया. उन्हें और उनके पति याकूब रसूल को अपने पांच बच्चों के साथ गुजरात और गुजरात के बाहर 10 बार घर बदलना पड़ा.

उनके पति रसूल कहते हैं, “हम अब भी घर नहीं जा सकते हैं क्योंकि हम डरे हुए है. पुलिस और प्रशासन ने हमेशा हम पर अत्याचार करने वालों का साथ दिया है. जब हम गुजरात में होते हैं तो अब भी अपने चेहरे ढँक कर रखते हैं. हम कभी भी अपना पता किसी को नहीं देते हैं.”

2002 में हुए गुजरात दंगों में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे. इनमें से ज्यादातर मुस्लिम थे.

इन दंगों की शुरुआत गोधरा में 60 हिंदू तीर्थ यात्रियों की मौत के बाद हुई थी. इनकी मौत साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगने के कारण हुई थी.

साबरमती एक्सप्रेसइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

इस ट्रेन में आग लगने के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया गया. इसकी प्रतिक्रिया में हिंदुओं की भीड़ ने गुजरात के कई शहरों में मुसलमान आबादी पर हमला कर दिया.

तीन दिनों तक दंगाइयों को कोई रोकने वाला नहीं था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने इस नरसंहार को रोकने के लिए कुछ नहीं किया.

लेकिन उन्होंने हमेशा सरकार की तरफ से किसी भी कोताही से इनकार किया और ना ही दंगों के लिए कभी कोई माफी मांगी.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने साल 2013 में उन्हें दोषमुक्त कर दिया और कहा कि उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं है.

‘घर छोड़कर भागना पड़ा’

बिलकीस अब भी उन दिनों को याद कर के सहम जाती हैं. वो अपने मां-बाप के घर रंधिकपुर गई हुई थीं जो गोधरा के पास ही है.

उस वक्त वो 19 साल की थी और तीन साल की एक बेटी की मां थीं.

उस वक्त वो गर्भवती थीं और उन्हें दूसरा बच्चा होने वाला था.

वो उस दिन की घटना को याद करती हैं, “ट्रेन में आग लगने के बाद की अगली सुबह थी. मैं रसोई में थी और दोपहर का खाना बना रही थी. तब तक मेरी चाची और उनके बच्चे दौड़ते हुए आए. वो चिल्लाते हुए कह रहे थे कि उनके घर में आग लगा दी गई है. हमें जल्दी से जल्दी घर छोड़कर भागना पड़ेगा.”

“हमने जो कपड़े पहन रखे थे, उन्हीं कपड़ों में हम बिना समय गंवाए भागे. यहां तक कि हमारे पास चप्पल पहनने तक का समय नहीं था.”

कुछ ही मिनटों में आस-पास के सभी मुसलमान परिवार अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश में भाग खड़े हुए थे.

बिलकीस बानो अपने परिवार के 17 लोगों के साथ थीं. उनके साथ तीन साल की उनकी बेटी, एक गर्भवती चचेरी बहन, उनके छोटे भाई-बहन, भतीजियां और भांजे, और दो वयस्क पुरुष थे.

बिलकीस बताती हैं, “हम सबसे पहले गांव के सरपंच के पास सुरक्षा के लिए गए, लेकिन जब भीड़ ने सरपंच को भी मारने की धमकी देने लगे तो हम गांव छोड़ने पर मजबूर हो गए.”

अगले कुछ दिनों तक वो अपने परिवार के साथ गांव दर गांव भटकती रहीं. कभी मस्जिदों में तो कभी किसी हिंदू परिवारों के रहमो-करम पर वो भटकते रहे.

तलवार और डंडों से हमला

ऐसे ही समय बीतता गया. तीन मार्च की सुबह जब वो बगल के एक गांव में जाने की तैयारी में थे. तब दो जीपों में सवार कुछ लोग आ धमके और उन पर हमला कर दिया.

बिलकीस बताती हैं, “उन्होंने हमारे ऊपर तलवार और डंडों से हमला कर दिया. उनमें से एक ने मेरी बेटी को मेरी गोद में से छीन लिया और उसे ज़मीन पर पटक दिया. वो सिर के बल पत्थर पर जाकर गिरी.”

उन पर हमला करने वाले 12 लोग गांव के उनके पड़ोसी ही थे. वो हर रोज उन्हें देखते हुए पली-बढ़ी थीं.

उन लोगों ने उनके कपड़े फाड़ दिए और उनमें से कई उनके साथ बलात्कार करने के लिए आगे बढ़े. वो उनसे रहम की भीख मांगती रहीं.

वो उन लोगों से कहती रही कि वो पांच महीने की गर्भवती है लेकिन उन लोगों ने उनकी एक नहीं सुनी.

उनकी बहन जिसने भागने से दो दिनों पहले ही एक लड़की को जन्म दिया था, उसके साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई. उसके नवजात बच्चे को भी मार दिया गया.

बिलकीस बच गईं क्योंकि वो बेहोश हो गई थीं और हमलावरों ने उन्हें मरा हुआ समझकर छोड़ दिया था.

जब वो होश में आईं तो उन्होंने ख़ुद को खून में सने पेटीकोट से ढँका और नज़दीक की एक पहाड़ी पर किसी तरह पहुंचीं. वहां एक गुफा में वो छिप गईं.

बिलकीस बताती हैं, “अगले दिन मुझे जब बहुत जोर की प्यास लगी तो मैं नीचे उतर कर एक आदिवासी गांव में पहुंची. पहले तो गांव वालों ने मुझे शक की नज़र से देखा और डंडों के साथ आए, लेकिन फिर मेरी मदद की. उनहोंने मुझे एक ब्लाउज दिया और शरीर ढकने के लिए दुपट्टा दिया.”

वहां उन्हें एक पुलिस जीप दिखी. गांव वाले उन्हें पुलिस स्टेशन ले गए जहां उन्होंने पुलिस के सामने अपनी आपबीती सुनाई.

वो बताती हैं, “मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं इसलिए पुलिसवालों को कही कि वो मेरी शिकायत पढ़ कर सुनाए लेकिन उन्होंने सुनाने से मना कर दिया और मेरे अंगूठे का निशान ले लिया. उन्होंने अपनी मर्जी से जो चाहा, लिखा. मैं सभी दंगाइयों को जानती थीं. मैंने पुलिस को उनके नाम बताए थे लेकिन पुलिस ने किसी का नाम नहीं लिखा.”

अगले दिन उन्हें गोधरा के एक कैंप में भेज दिया गया. वहां उनकी मुलाकात अपने पति से हुई. वो उस कैंप में अगले चार-पांच महीने तक रहे.

पिछले कुछ दिनों से बिलकीस बानो के मामले की तुलना दिल्ली में 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप से हो रही है. बिलकीस बानो मामले में फ़ैसले के एक दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गैंगरेप मामले में चार दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई है.

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क्या फांसी होनी चाहिए?

अब कई लोग यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या बिलकीस बानो के मामले में दंगाइयों को फांसी की सज़ा नहीं होनी चाहिए? क्या उनका मामला दिल्ली गैंगरेप के मामले से कम भयावह था?

बिलकीस बानो मामले में अभियोक्ता पक्ष ने तीन लोगों के लिए मौत की सज़ा मांगी थी.

बिलकीस बानो का कहना है कि वो बदले में यकीन नहीं रखती.

वो कहती हैं, “दोनों ही मामले एक जैसे भयावह थे. लेकिन मैं किसी की ज़िंदगी लेने में यक़ीन नहीं रखती. मैं उनके लिए मौत की सज़ा नहीं चाहती. मैं चाहती हूं कि वो पूरी ज़िंदगी जेल में बिताए. मैं उम्मीद करती हूं कि एक दिन उन्हें अपने गुनाहों का अहसास होगा कि कैसे उन्होंने छोटे-छोटे बच्चों को मारा और औरतों के साथ बलात्कार किया. मैं बदला नहीं लेना चाहती. मैं चाहती हूं कि उन्हें अहसास हो कि उन्होंने क्या किया है.”

इन मुस्लिम स्वतंत्रा सेनानियों ने आज़ादी के लिए अपनी जान दे दी, जनता ने इन्हें भुला दिया

15 अगस्त भारत के ऐतिहास सबसे महत्वपूर्ण तारिख हैं, आज ही के दिन भारत ब्रिटिश हुकूमत से आज़ाद होकर एक स्वतंत्र राज्य बना था. इस दिन को हम दिवस स्वन्त्रता दिवस के नाम से जानते हैं. भारत को ब्रिटिश हुकूमत आज़ादी दिलाने में अनगिनत स्वतंत्रा सेनानियो ने अपनी जान की क़ुरबानी दी.
हम देखते हैं कि जब भी स्वतंत्रा सेनानियो की बात आती हैं तो मुस्लिम स्वतंत्रा सेनानियो के नाम पर सिर्फ एक ही नाम सामने निकल कर आता हैं. और स्वतंत्रता संग्राम के मुस्लमान क्रांतकारियो को इतिहास के पन्नो से मिटा दिया गया हैं.
जब-कभी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की बात होती है तो मुस्लिम समुदय से सिर्फ एक ही नाम सामने अत हैं. जहाँ देखो वहीं दिखाई देता है. लेकिन उसके अलावा किसी का नाम नज़र नहीं आता हैं.
उस नाम से आप भी अच्छी तरह वाकिफ हैं, जी हाँ वह और कोई नहीं ‘अशफ़ाक़ उल्लाह खान’ का नाम दिखाई देता हैं. तो मुद्दा यह हैं कि क्या सिर्फ अशफ़ाक़ उल्लाह खान भारत के स्वतंत्रा आंदोलन में शामिल थे.
इसके अलावा एक और नाम हैं मौलाना अबुल कलाम आज़ाद” जिसे देखकर हमने भी यही समझ लिया कि मुसलमानो में सिर्फ मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, अशफ़ाक़ उल्लाह खान के बाद दुसरे ऐसे मुस्लमान थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा थे जिन्होने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन मे हिस्सा लिया था.
जब मैं अपने स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहा था, तो उस दौरान मैंने इतिहास से सम्बंधित जितनी भी किताबे पढ़ी उन सभी में मैंने अशफ़ाक़ उल्लाह खान के अलावा किसी भी मुसलमान का नाम स्वतंत्रा आंदोलन में शामिल नहीं मिला.
बल्कि अगर अस्ल तारिख का गहन अध्यन किया जाये, तो आप देखेगे 1498 की शुरुआत से लेकर 1947 तक मुस्लमानो ने विदेशी आक्रमणकारियो से जंग लड़ते हुए अपनी जानो को शहीद करते हुए सब कुछ क़ुरबान कर दिया.
इतिहास के पन्नों में अनगिनत मुस्लिम हस्तियों के नाम दबे पड़े हैं जिन्होने भारतीय स्वतंत्रा आंदोलन में अपने जीवन का बहुमूल्य योगदान दिया जिनका ज़िक्र भूले से भी हमें सुनने को नहीं मिलता हैं. जबकि अंग्रेजों के खिलाफ भारत के संघर्ष में मुस्लिम क्रांतिकारियों, कवियों और लेखकों का योगदान भुलाया नहीं जा सकता है.

शाह अब्दुल अज़ीज़ रह ० का अंग्रेज़ो के खिलाफ फतवा

1772 मे शाह अब्दुल अज़ीज़ रह ० ने अंग्रेज़ो के खिलाफ जेहाद का फतवा दे दिया ( हमारे देश का इतिहास 1857 की मंगल पांडे की क्रांति को आज़ादी की पहली क्रांति मन जाता हैं) जबकि सचाई यह है कि शाह अब्दुल अज़ीज़ रह ० 85 साल पहले आज़ादी की क्रांति की लो हिन्दुस्तानीयो के दिलों मे जला चुके थे. इस जेहाद के ज़रिये उन्होंने कहा के अंग्रेज़ो को देश से निकालो और आज़ादी हासिल करो.
यह फतवे का नतीजा था कि मुस्लमानो के अन्दर एक शऊर पैदा होना शुरू हो गया के अंग्रेज़ लोग फकत अपनी तिजारत ही नहीं चमकाना चाहते बल्कि अपनी तहज़ीब को भी यहां पर ठूसना चाहते है.


हैदर अली और टीपू सुल्तान की वीरता 

हैदर अली और बाद में उनके बेटे टीपू सुल्तान ने ब्रिटिश इस्ट इंडिया कंपनी के प्रारम्भिक खतरे को समझा और उसका विरोध किया.

टीपू सुल्तान भारत के इतिहास में एक ऐसा योद्धा भी था जिसकी दिमागी सूझबूझ और बहादुरी ने कई बार अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. अपनी वीरता के कारण ही वह ‘शेर-ए-मैसूर’ कहलाए.
अंग्रेजों से लोहा मनवाने वाले बादशाह टीपू सुल्तान ने ही देश में अंग्रेजो के ज़ुल्म और सितम के खिलाफ बिगुल बजाय था, और जान की बाज़ी लगा दी मगर अंग्रेजों से समझौता नहीं किया. टीपू अपनी आखिरी साँस तक अंग्रेजो से लड़ते-लड़ते शहीद हो गए. टीपू की बहादुरी को देखते हुए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें विश्व का सबसे पहला राकेट आविष्कारक बताया था.


बहादुर शाह ज़फ़र

बहादुर शाह ज़फ़र (1775-1862) भारत में मुग़ल साम्राज्य के आखिरी शहंशाह थे और उर्दू भाषा के माने हुए शायर थे. उन्होंने 1857  का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय सिपाहियों का नेतृत्व किया. इस जंग में हार के बाद अंग्रेजों ने उन्हें बर्मा (अब म्यांमार) भेज दिया जहाँ उनकी मृत्यु हुई.
1857 का भारतीय विद्रोह, जिसे प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, सिपाही विद्रोह और भारतीय विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है ब्रितानी शासन के विरुद्ध एक सशस्त्र विद्रोह था. यह विद्रोह दो वर्षों तक भारत के विभिन्न क्षेत्रों में चला. इस विद्रोह का आरंभ छावनी क्षेत्रों में छोटी झड़पों तथा आगजनी से हुआ था परन्तु जनवरी मास तक इसने एक बड़ा रुप ले लिया. विद्रोह का अन्त भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासन की समाप्ति के साथ हुआ और पूरे भारत पर ब्रिटेनी ताज का प्रत्यक्ष शासन आरंभ हो गया जो अगले 10 वर्षों तक चला.

ग़दर आंदोलन

गदर शब्द का अर्थ है विद्रोह, इसका मुख्य उद्देश्य भारत में क्रान्ति लाना था. जिसके लिए अंग्रेज़ी नियंत्रण से भारत को स्वतंत्र करना आवश्यक था.गदर पार्टी का हैड क्वार्टर सैन फ्रांसिस्को में स्थापित किया गया, भोपाल के बरकतुल्लाह ग़दर पार्टी के संस्थापकों में से एक थे जिसने ब्रिटिश विरोधी संगठनों से नेटवर्क बनाया था.
ग़दर पार्टी के सैयद शाह रहमत ने फ्रांस में एक भूमिगत क्रांतिकारी रूप में काम किया और 1915 में असफल गदर (विद्रोह) में उनकी भूमिका के लिए उन्हें फांसी की सजा दी गई. फैजाबाद (उत्तर प्रदेश) के अली अहमद सिद्दीकी ने जौनपुर के सैयद मुज़तबा हुसैन के साथ मलाया और बर्मा में भारतीय विद्रोह की योजना बनाई और 1917 में उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था.

खुदाई खिदमतगार मूवमेंट 


लाल कुर्ती आन्दोलन भारत में पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रान्त में ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्थन में खुदाई ख़िदमतगार के नाम से चलाया गया जो की एक ऐतिहासिक आन्दोलन था. विद्रोह के आरोप में उनकी पहली गिरफ्तारी 3 वर्ष के लिए हुई थी.
उसके बाद उन्हें यातनाओं की झेलने की आदत सी पड़ गई. जेल से बाहर आकर उन्होंने पठानों को राष्ट्रीय आन्दोलन से जोड़ने के लिए ‘ख़ुदाई ख़िदमतग़ार’ नामक संस्था की स्थापना की और अपने आन्दोलनों को और भी तेज़ कर दिया.

अलीगढ़ आन्दोलन


सर सैय्यद अहमद खां ने अलीगढ़ मुस्लिम आन्दोलन का नेतृत्व किया. वे अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारम्भिक काल में राजभक्त होने के साथ-साथ कट्टर राष्ट्रवादी थे. उन्होंने हमेशा हिन्दू-मुस्लिम एकता के विचारों का समर्थन किया.
1884 ई. में पंजाब भ्रमण के अवसर पर हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल देते हुए सर सैय्यद अहमद खाँ ने कहा था कि, हमें (हिन्दू और मुसलमानों को) एक मन एक प्राण हो जाना चाहिए और मिल-जुलकर कार्य करना चाहिए.
यदि हम संयुक्त है, तो एक-दूसरे के लिए बहुत अधिक सहायक हो सकते हैं। यदि नहीं तो एक का दूसरे के विरूद्ध प्रभाव दोनों का ही पूर्णतः पतन और विनाश कर देगा. इसी प्रकार के विचार उन्होंने केन्द्रीय व्यवस्थापिका सभा में भाषण देते समय व्यक्त किये. एक अन्य अवसर पर उन्होंने कहा था कि, हिन्दू एवं मुसल्मान शब्द को केवल धार्मिक विभेद को व्यक्त करते हैं, परन्तु दोनों ही एक ही राष्ट्र हिन्दुस्तान के निवासी हैं.
सर सैय्यद अहमद ख़ाँ द्वारा संचालित ‘अलीगढ़ आन्दोलन’ में उनके अतिरिक्त इस आन्दोलन के अन्य प्रमुख नेता थे.

नजीर अहमद

चिराग अली

अल्ताफ हुसैन

मौलाना शिबली नोमानी

यह तो अभी चुनिंदा लोगो के नाम हमने आपको बातये हैं. ऐसे सैकड़ो मुसलमान थे जिन्होंने भारत की आज़ादी की लड़ाई में अपने जीवन को कुर्बान कर देश को आज़ाद कराया. इतना ही नहीं मुस्लिम महिलाओ में बेगम हजरत महल, अस्घरी बेगम, बाई अम्मा ने ब्रिटिश के खिलाफ स्वतंत्रता के संघर्ष में योगदान दिया है. पर अफ़सोस भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इतने मुस्लमानो के शहीद होने के बाद भी हमको मुस्लमानो के योगदान के बारे में नहीं बताया जाता.

अंग्रेज़ो के खिलाफ पहली आवाज़ उठाने वाले मुस्लमान 

  • नवाब सिराजुद्दौला
  • शेरे-मैसूर टीपू सुल्तान
  • हज़रत शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी
  • हज़रत शाह अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिस देहलवी
  • हज़रात सयेद अहमद शहीद
  • हज़रात मौलाना विलायत अली सदिकपुरी
  • अब ज़फर सिराजुद्दीन मुहम्मद बहादुर शाह ज़फर
  • अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी
  • शहज़ादा फ़िरोज़ शाह
  • मोलवी मुहम्मद बाकिर शहीद
  • बेगम हज़रत महल
  • मौलाना अहमदुल्लाह शाह
  • नवाब खान बहादुर खान
  • अजीज़न बाई
  • मोलवी लियाक़त अली अल्लाहाबाद
  • हज़रत हाजी इमदादुल्लाह मुहाजिर मकई
  • हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम ननोतवी
  • मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी
  • शेखुल हिन्द हज़रत मौलाना महमूद हसन
  • हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी
  • हज़रत मौलाना रशीद अहमद गंगोही
  • हज़रत मौलाना अनवर शाह कश्मीरी
  • मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली
  • हज़रत मौलाना किफायतुल्लाह
  • सुभानुल हिन्द मौलाना अहमद सईद देहलवी
  • हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी
  • सईदुल अहरार मौलाना मुहम्मद अली जोहर
  • मौलाना हसरत मोहनी
  • मौलाना आरिफ हिसवि
  • मौलाना अबुल कलम आज़ाद
  • हज़रत मौलाना हबीबुर्रहमान लुधयानवी
  • सैफुद्दीन कचालू
  • मसीहुल मुल्क हाकिम अजमल खान
  • मौलाना मज़हरुल हक़
  • मौलाना ज़फर अली खान
  • अल्लामा इनायतुल्लाह खान मशरिक़ी
  • डॉ.मुख़्तार अहमद अंसारी
  • जनरल शाहनवाज़ खान
  • हज़रत मौलाना सयेद मुहम्मद मियान
  • मौलाना मुहम्मद हिफ्जुर्रहमान स्योहारवी
  • हज़रत मौलाना अब्दुल बरी फिरंगीमहली
  • खान अब्दुल गफ्फार खान
  • मुफ़्ती अतीक़ुर्रहमान उस्मानी
  • डॉ.सयेद महमूद
  • खान अब्दुस्समद खान अचकजाई
  • रफ़ी अहमद किदवई
  • युसूफ मेहर अली
  • अशफ़ाक़ उल्लाह खान
  • बैरिस्टर आसिफ अली
  • हज़रत मौलाना अताउल्लाह शाह बुखारी
  • अब्दुल क़य्यूम अंसारी

Facebook new feature ‘REACT’ 

  • Facebook add a new feature called”Reaction”to Facebook user worldwide.
  • The new feature serves as an extension of like button.
  • Now instead of only being able to like a post,f Facebook user can choose six different emojis reaction:Love,Haha,Like,Wow,Sad and Angry.
  • You can use this feature instead of likes or comments. 

National Highways In India

• NH 1 – Delhi-Jalandhar-Amritsar-Wagah Border

• NH 1A – Jalandhar-Jammu-Srinagar-Uri

• NH 2 – Delhi-Agra-Allahabad-Kolkata

• NH 3 – Agra-Indore-Dhule-Mumbai

• NH 4 – Thane-Pune-Bangalore-Chennai

• NH 5 – Jharpokaria-Baleshwar-Cuttack-Vijaywada-Chennai

• NH 6 – Dhule-Nagpur-Kolkata

• NH 7 – Varanasi-Nagpur-Bangalore-

Kannyakumari

• NH 8 – Delhi-Jaipur-Ahmadabad-Mumbai

• NH 8A – Mandvi – Ahmadabad

• NH 8B – Porbandar to Bamanbor

• NH 8D – Somnath to Jetpur

• NH 9 – Pune-Solapur-Hyderabad-Vijaywada

• NH 10 – Pacca-Chisti-Fazilika-Abohar-Delhi

• NH 11 – Agra-Jaipur-Bikaner

• NH 12 – Jaipur-Bhopal-Jabalpur

• NH 13 – Solapur-Bijapur-Chitradurga

• NH 14 – Radhanpur- Sirohi-Beawar

• NH 15 – Pathankot- Amritsar-Jaisalmer-Samkhiyali

• NH 16 – Nizamabad-Mancheral-Jagdalpur

• NH 17 – Panvel – Mapusa – Mangalore-Kozhikode

• NH 18 – Kurnool- Kalakada- Chittoor

• NH 19 – Ghazipur – Rudrapur- Sonpur-Hajipur- Patna

• NH 20 – Pathankot-Gaggal-Palampur-Mandi

• NH 21 – Chandigarh- Bilaspur-Mandi-Kullu-Manali

• NH 22 – Ambala-Kalka-Solan-Rampur-Jangi-Khab

• NH 23 – Chas-Ramgarh-Ranchi-Samal-Nuhata

• NH 24 – Delhi-Bareilly-Lucknow

• NH 25 – Lucknow-Jhansi-Shivpuri

• NH 26 – Jhansi-Sagar-Lakhnadon

• NH 27 – Allahabad – Sohagi- Mangawan

• NH 28 – Lucknow to Barauni

• NH 29 – Varanasi- Sarnath- Gorakhpur

• NH 30 – Mohania -Kochas-Patna-

Bakhtiyarpur

• NH 31 – Barhi-Chandi-Purnia-Nalbari-Guwahati

• NH 32 – Gobindpur- Asansol- Purliya-Jamshedpur

• NH 33 – Barhi -Hazirabagh- Chandil-

Baharagora

• NH 34 – Kolkata -Rajinagar- Durgapur-Dalkhola

• NH 36 – Nagaon-Dabaka-Dimapur

• NH 37 – Goalpara-Dispur-Chabua-Saikhoa Ghat

• NH 39 – Numaligarh-Golaghat-Dimapur-Kohima-Mayanmar Border

• NH 40 – Jorabat-Umling-Shillong-Jowai

• NH 41 – Kolaghat – Tamluk- Durgachak-Haldia

• NH 42 – Sambalpur – Angul-Cuttack

• NH 43 – Raipur-Keskal-Sunabeda-Chittivalasa

• NH 44 – Shillong to Sabroom

• NH 45 – Chennai – Tiruchchirappalli-

Dindigul

• NH 45A – Viluppuram – Pondicherry-

Nagore -Nagapattinam

• NH 45B -Tiruchhirapalli to Tuticorin

• NH 46 – Ranipettati- Arcot-Vellore –

Krishnagiri

• NH 47 – Salem-Kollam-Thiruvananthapuram-Kannyakumari

• NH 48 – Mangalore – Hassan-Solur-

Nelamangala

• NH49 – Kochi to Rameswaram

• NH 50 – Pune – Khed- Nadur- Sinner

• NH 53 – Imphal-Silchar-Bhanga

• NH 55 – Siliguri – Matigara- Darjeeling

• NH 56 – Lucknow-Jaunpur-Phulpur –

Varanasi

• NH 57 – Muzzaffarpur – Madhepur-Purnia

• NH 58 – Mana -Badrinath-Haridwar –Meerut- Modinagar- Delhi

• NH 59 – Ahmadabad-Rajgarh-Dhar-Indore

• NH 60 – Asansol – Medinipur- Basta0-Rupsa- Balasor

• NH 63 – Ankola-Hubli-Bellari- Gooty

• NH 64 – Chandigarh -Banar-Patiala-

Barnala- Bhatinda-Dabwali

• NH 65 – Ambala -Fatehpur -Jodhpur -Pali

• NH 66 – Krishnagiri -Nattur-Kiliyanur-Pondicherry

• NH 67 – Coimbatore -Karur- Thanjavur-Nagappattinam

• NH 68 – Salem- Attur-Elavanasur-

Ulundurpettal

• NH 69 – Obaidukkagan-Multai-Chicholi-Nagpur

• NH 71 – Jalandhar -Jind- Rohtak- Rewari-Bawal

• NH 72 – Ambala -Paonta Sahib-Dehradoon-Haridwar

• NH 73 – Ambala -Saharanpur- Roorkee

• NH 74 – Bareilly -Sitarganj-Nagina-Haridwar

• NH 75 – Gwalior-Jhansi-Panna-Satna-Rewa

• NH 76 – Pindwara-Jhansi-Attara –Allahabad

• NH 77 – Sonbarsa -Dumra-Muzzafarpur-Hazipur

• NH 78 – Katni-Pali-Nagpur-Karabel-Gumla

• NH 79 – Ajmer-Bhilwara-Ratlam -Ghat Bilod

• NH 83 – Patna – Gaya- Bara -Dobhi

• NH 87 – Nanital-Ranibagh-Haldwani-Rampur

• NH 200 – Raipur-Bilaspur-Naikul-Sukinda

• NH 201 – Bargarh – Kesinga- Ampani-Boriguma

• NH 202 – Hyderabad – Ghanpur- Nagaram– Bholpalpatnam

• NH 204 – Ratnagiri – Malkapur – Kolhapur

• NH 205 – Anantapur -Tiruparti- Nagari –Chennai

• NH 206 – Honavar -Sagar- Kadur- Banavar-Tumkur

• NH 208 – Kollam -Sivagiri- Kallupatti -Madurai

• NH 209 – Bangalore – Pollachi- Palani –Dindigul

• NH 210 – Tiruchchirapalli – Kiranur-

Devipattinam

• NH 211 – Solapur- Vedshi-Adul-Dhule