दुआ

किसी ने हजरत अली से पूछा कि जिनकी माँ नहीं होती है उनके बच्चों को कौन दुआ देता है आप ने फरमाया की कोई झील अगर कभी सूख जाए तो उसकी मिट्टी की नमी नहीं जाती उसी तरह माँ इंतकाल के बाद भी अपनी औलाद को दुआएं देती रहती है ।

सूबहानअललाह माँ

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माँ अब बूढ़ी हो गईं हैं

मैं अब बड़ा हो गया हूँ,शादी हो गई है,बच्चे हो गये हैं,अच्छा पैसा कमाने लगा हूँ।

और मां….माँ अब बूढ़ी हो गईं हैं।वो मेरे बड़े भाई के पास नहीं रहती,वो मेरे पास रहती हैं।

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नहीं,बिल्कुल नहीं…..मैं माँ के पास रहता हूँ।मैं आज भी मेरीमैं अब बड़ा हो गया हूँ,शादी हो गई है,बच्चे हो गये हैं,अच्छा पैसा कमाने लगा हूँ।

और मां….माँ अब बूढ़ी हो गईं हैं।वो मेरे बड़े भाई के पास नहीं रहती,वो मेरे पास रहती हैं।

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नहीं,बिल्कुल नहीं…..मैं माँ के पास रहता हूँ।मैं आज भी मेरी माँ के पास रहता हूँ।मैं इतना बड़ा कभी नहीं हो सकता,कि उनको रख सकूँ।

मैं हमेशा उनके पास रहूँगा।❤ माँ के पास रहता हूँ।मैं इतना बड़ा कभी नहीं हो सकता,कि उनको रख सकूँ।

मैं हमेशा उनके पास रहूँगा।❤

माँ के आँचल

मुझे याद है मेरी माँ के आँचल की गाँठ जिसमें बांधे रखती थी वो सिक्के जिनके बदले वो अक्सर मेरी मुस्कान ख़रीदा करती थी! ❤️

परवरिश

मैंने माँ पर कुछ नहीं लिखा,लिखने को तो बहुत कुछ था,दो कोस लंबा आर्टिकल लिख सकता था।एक सवाल ने मुझे हमेशा परेशान किया है,क्या माँ का इस तरह गुणगान उन औरतो को परेशान नहीं करता जो जन्मना कमतरी से माँ नहीं बन पाई?माँ होने में कोई महानता नहीं यह तो कुदरत का निज़ाम है,असल महानता तो परवरिश में है।परवरिश ही होती है जो हमे सब कुछ बनाती है।माँ होने की नुमाइश करना एक तरह से ऐसा है जैसे गरीब के सामने अपनी दौलत की नुमाइश करना।यह माँ का गुणगान ही है जो उसे सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन तक महदूद कर देता है और बाँझ जैसे लफ़्ज़ों का उदय होता है।उस औरत को अछूत समझ जाता है जबकि इसमें उसका कोई दोष ही नहीं था।हम ऐसे पाखंडी है जो अपराधियो को अलंकृत करते है और रब के बनाए इंसान को जिसमे कुछ कुदरती कमतरी है और जिसमे उसका कोई दोष ही नहीं को अछूत बना देते है।कभी नहीं देखा की किसी अपराधी को कभी अछूत बनाया गया हो।