​मुसलमान #वंदे_मातरम क्यों नहीं कहते ?

मुसलमान #वंदे_मातरम क्यों नहीं कहते ?

#वंदे_मातरम कहने में मुसलमानों की मजबूरी क्या है ?

वंदना अर्थात स्तुति और वंदना या स्तुति उसीकी की जाती है जिसकी पूजा की जाती हो !

कण-कण में भगवान है जैसे शब्दों को मानने वाला हिंदू “भारत माता की जय, वंदे मातरम” जैसे शब्द बोल कर गर्वान्वित हो सकता है परंतु मुसलमान के लिए यह बोल पाना बहुत ही कठिन है, क्योंकि वह किसी एक की वंदना करता है !

मुसलमान बनने की पहली शर्त “आशहदो अन्ना लाइलाहा इल्लल्लाह व आशह दो अन्ना मोहम्मद रसूल अल्लाह”

अर्थार्थ मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई पूजनीय नहीं और मोहम्मद साहब अल्लाह के रसूल हैं !

यहां समझिए कोई भी मुसलमान अल्लाह को छोड़कर उसकी पूजा, इबादत नहीं कर सकता, हां किसी का आदर, सम्मान, प्रेम जरूर कर सकता है !

– दुनिया के मुसलमान सबसे अधिक आदर, सम्मान और प्रेम मोहम्मद साहब की करते हैं, लेकिन उनकी वंदना नहीं करते वंदना सिर्फ अल्लाह की करते हैं !

– अपने मां के चरणो में जन्नत, एसा मानने वाले मुसलमान अपने मां की आदर करते हैं, सम्मान करते हैं परंतु वंदना नहीं करते क्योंकि वंदना सिर्फ अल्लाह की करते हैं !

– इस देश के करोड़ों मुसलमान इस देश से प्यार करते हैं सम्मान करते हैं परंतु वंदना नहीं कर सकते क्योंकि वंदना सिर्फ अल्लाह की करते हैं !

– इस देश पर कोई संकट आ जाए वह हंसकर अपने प्राण निछावर कर सकते हैं परंतु बंदना नहीं कर सकते क्योंकि वह वंदना सिर्फ अल्लाह की करते हैं !

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