हिजाब(Hijab)

कुछ साल पहले की बात है हमारे दोस्त की बहन दिल्ली यूनीवर्सिटी में पढ़ती थी। उनकी माली हालत इतनी ठीक नही थी कि पढाई का बोझ उठा सके इसलिए उनकी बहन ने ट्युशन पढ़ा कर पढाई का खर्च निकालना शुरू किया। उनके पास गली के ही 10-15 बच्चे आते थे जैसे तैसे करके वो अपनी पढाई का खर्च निकाल लेती थी। उनमे एक बदलाव आया कि जब वो स्कूल में थी तब बुर्का नहीं पहनती थी पर जब कॉलेज में आई तो उन्होंने बुर्का पहनना शुरू कर दिया था। हालांकि उनके घर का माहौल इस्लामिक नही था फिर भी उन्होंने बुर्का पहनना शुरू कर दिया था। कॉलेज खत्म होने के बाद उन्होंने एक बार बताया कि उन्होंने बुर्का पहनना क्यूँ शुरू किया था और उसकी असल वजह थी कि उनके पास ज्यादा कपडे नहीं थे कि पढाई के साथ महंगे कपडे खरीद सके तो उन्होंने मटिया महल से एक बुर्का खरीद लिया ताकि कपड़ों पर पैसे जाया न हो और पढाई करते वक़्त पुराने कपड़ों की वजह से साथ पढने वाले बच्चों के बीच एहसास ए कमतरी का शिकार न हो। उन्होंने पूरी कॉलेज एक बुर्के पहन कर गुजार दी और बुर्के की वजह से कॉलेज के लफंगे भी तमीज से पेश आते हैं। अब वो अपने खाविंद के साथ विदेश में है और उनकी एक डेड साल की बेटी भी है। असल में पोस्ट इसलिए लिखी कि दो दिन से बुर्के पर बहस हो रही थी तो मैंने भी सोचा कि मैं ये किस्सा आपसे शेयर कर दूं ताकि ये पता लगे कि बुर्के पहनने से एक लड़की को कितना फायदा हुआ। असल में बुर्का सामजिक समानता का प्रतिक है और ऐसे समाज की बुनियाद डालता है जो दिखावे और बाहरी आडम्बर से परे हो। जहाँ एक दुसरे की बीवियों को देखकर आदमी की अपनी मोहतरमा में दिलचस्पी कम न हो। और न अपनी मोहतरमा में किसी दुसरे की दिलचस्पी पैदा हो। वो ऐसा समाज हो जहाँ कपड़ों और गहनों की वजह से आर्थिक असमानता उत्पन्न न हो। जहाँ कोई गरीब और सस्ते कपडे की वजह से एहसास ए कमतरी का शिकार न हो ।जिस समाज में खुलापन ज्यादा है वहां दिखावा भी ज्यादा है उनकी पूरी ज़िन्दगी क्या पहनना है और कितना खुदको सजाना है ताकि आगे वाले को कायल कर सके पर टिकी है इसकी वजह से समाज में एक अनदेखा मानसिक तनाव उत्पन्न हो गया है। और उस मानसिक तनाव को दूर करने के लिए इंसान शराब से लेकर जिना के अड्डो पर सुकून तलाश रहा है। पर ये भी हकीकत है कि मुस्लिम नौजवान औरतों के मामले में इस्लाम की दलीलें लाकर रख देते हैं पर वही नौजवान इस्लाम ने औरतों को क्या हुकूक दिए हैं इस पर कम ही बात करते हैं।