लड़की_को_मर्द_के_साथ_बराबरी_की_ज़िद_नहीं_बल्कि_इन_खूबसूरत_अहसासात_की_तमन्ना_करनी_चाहिए।

एक महिला की ज़बानी उस के 

अपने सपनों के शहज़ादे की कहानी..।

मुझे अच्छा लगता है मर्द से मुकाबला ना करना और उस से एक दर्जा कमज़ोर रहना – 

मुझे अच्छा लगता है जब कहीं बाहर जाते हुए वह मुझ से कहता है “रुको! मैं तुम्हे ले जाता हूँ या मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ ”

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझ से एक कदम आगे चलता है – गैर महफूज़ और खतरनाक रास्ते पर उसके पीछे पीछे उसके छोड़े हुए क़दमों के निशान पर चलते हुए एहसास होता है उसने मेरे ख्याल से क़दरे हमवार रास्ते का इंतेखाब किया – 

मुझे अच्छा लगता है जब गहराई से ऊपर चढ़ते और ऊंचाई से ढलान की तरफ जाते हुए वह मुड़ मुड़ कर मुझे चढ़ने और उतरने में मदद देने के लिए बार बार अपना हाथ बढ़ाता है –

मुझे अच्छा लगता है जब किसी सफर पर जाते और वापस आते हुए सामान का सारा बोझ वह अपने दोनों कंधों और सर पर बिना दरख्वास्त किये खुद ही बढ़ कर उठा लेता है – और अक्सर वज़नी चीजों को दूसरी जगह मुंतकिल करते वक़्त उसका यह कहना कि “तुम छोड़ दो यह मेरा काम है “- 

मुझे अच्छा लगता है जब वह मेरी वजह से शदीद मौसम में सवारी का इंतज़ार करने के लिए निसबतन साया दार और महफूज़ मक़ाम इंतेखाब करता है –

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे ज़रूरत की हर चीज़ घर पर ही मुहैय्या कर देता है ताकि मुझे घर की जिम्मेदारियों के साथ साथ बाहर जाने की दिक़्क़त ना उठानी पड़े और लोगों के नामुनासिब रावैय्यों का सामना ना करना पड़े –

मुझे बहोत अच्छा लगता है जब रात की खनकी में मेरे साथ आसमान पर तारे गिनते हुए वह मुझे ढंड लग जाने के डर से अपना कोट उतार कर मेरे शानों पर डाल देता है –

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे मेरे सारे गम आंसुओं में बहाने के लिए अपना मज़बूत कंधा पेश करता है और हर कदम पर अपने साथ होने का यकीन दिलाता है –

मुझे अच्छा लगता है जब वह बदतरीन हालात में मुझे अपनी मताअ ए हयात मान कर तहफ़्फ़ुज़ देने केलिए मेरे आगे ढाल की तरह खड़ा हो जाता है और कहता है ” डरो मत मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा” –

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे गैर नज़रों से महफूज़ रहने के लिए नसीहत करता है और अपना हक जताते हुए कहता है कि “तुम सिर्फ मेरी हो ” –

लेकिन अफसोस हम में से अक्सर लड़कियां इन तमाम खुशगवार अहसासात को महज मर्द से बराबरी का मुकाबला करने की वजह से खो देती हैं –

शायद सफेद घोड़ों पर सवार शहज़ादों ने आना इसीलिए छोड़ दिया है क्योंकि हमने खुद को मस्नूआत की तरह इंतेखाब के लिए बाज़ारों में पेश करदिया है –

फिर ۔۔۔۔۔۔۔۔

जब मर्द यह मान लेता है कि औरत उस से कम नहीं तब वह उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाना छोड़ देता है – तब ऐसे खूबसूरत लम्हात एक एक करके ज़िन्दगी से नफ़ी होते चले जाते हैं , और फिर ज़िन्दगी बे रंग और बदमज़ह हो कर अपना तवाजुन खो देती है 

मुक़ाबला बाज़ी की इस दौड़ से निकल कर अपनी ज़िंदगी के ऐसे लतीफ लम्हात का असासा महफूज़ कर लीजिए –

अल्लाह करे हर आैरत को एेसा शाैहर मिले जो आैरत के हुकूक जानता हो आैर हर मर्द को ऐसी बीवी मिले जो शाैहर की कद्रदान हो।